मैं एक नारी हूँ
मैं बिन माँगे सब
दे जाती हूँ ।
मै्ं अपने जगह पर खडी
सबकी चाहत हूँ ।
मैं पत्नी,जननी,दूहिता, भगिनी हूँ।
मैं एक नारी हूँ ।
मैं खुद जीती हूँ
दूसरों को जीने भी
देती हूँ ।
मैं अपने संस्कार खुद
बनाती हूँ ।
मैं प्रेम की भाषा
पढाती हूँ ।
मैं पाप पुण्य का हिसाब
निकाश करती हूँ ।
मैं एक नारी हूँ।
मैं अपनी तकदीर खुद
लिखती हूँ ।
पर मैं सबकी तकदीर
बनजाती हूँ ।
मैं बच्चों को उडाना सिखाती हूँ ।
मैं उन्हे हर कदम
मजबुत बनाती हूँ ।।
मैं आजकी नारी हूँ !!!
मैं धर्म कर्म जानती हूँ ।
मैं पाप पुण्य का बिचार
करती हूँ ।
मैं खुद पर भरोसा रखती हूँ
मैं खुद पर नाज करती हूँ ।
मैं आज की नारी हूँ !!!!
मैं लक्ष्मण रेखा खुद
बनाती हूँ ।
मैं अपने और अपनों की
रक्षा करती हूँ ।
न मैं नाचार हूँ ,
न मैं कमजोर हूँ ,
न मैं अबला हूँ ,
न मैं दुबला हूँ ।।
खुद पर मुझे गर्व है....!!!!
क्यों की मैं आजकी नारी हूँ ।
❤❤❤❤❤❤
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